क्या आप बिजली का बिल कम करना चाहते हैं? कासगंज में सोलर लगवाने के लिए हम आपको DVVNL की सूची में शामिल सोलर कंपनियों से जोड़ते हैं। सब्सिडी की प्रक्रिया समझने और सही कीमत जानने में भी मदद करते हैं।
कासगंज में अपने घर की छत पर सोलर लगवाएँ और ₹1,08,000 तक की सरकारी सब्सिडी पाएँ।

सोलर लगवाने से कितनी बचत हो सकती है? कासगंज के ये आँकड़े देखिए:
*सरकारी सब्सिडी केवल घरों के लिए है (अपने घर और 10 kW तक के स्वीकृत लोड पर)। दुकान, ऑफ़िस और फ़ैक्ट्री में भी सोलर लगवाया जा सकता है, लेकिन उन पर यह सब्सिडी लागू नहीं होती। कारोबार के लिए जानकारी देखें ›
ध्यान दें: यहाँ दी गई कीमत, सब्सिडी और बचत के आँकड़े अनुमानित हैं। आपके घर में कितने बड़े सिस्टम की ज़रूरत है, वास्तविक खर्च कितना होगा और सब्सिडी मिलेगी या नहीं, यह छत की जाँच और बिजली विभाग की मंज़ूरी के बाद ही तय होगा।
कासगंज में घर की छत पर सोलर लगवाकर बिजली के बिल में बचत करें। 3 kW सिस्टम की अनुमानित कीमत ₹1,75,000–₹2,15,000 है। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की कुल ₹1,08,000 तक की सब्सिडी मिलने पर आपकी जेब से लगभग ₹67,000–₹1,07,000 खर्च होंगे। इस हिसाब से लागत करीब 3 से 4 साल में निकल सकती है। इसके बाद भी सिस्टम 20 साल से ज़्यादा बिजली बनाता रहेगा।
ये अनुमान कासगंज में मिलने वाली औसत धूप (5.2 kWh/m²/दिन), DVVNL की घरेलू बिजली दरों (₹3.35 से ₹6.50 प्रति यूनिट) और सब्सिडी से पहले ₹1,75,000–₹2,15,000 की कीमत पर आधारित हैं। अलीगढ़ मंडल में काम करने वाली DVVNL की सूचीबद्ध सोलर कंपनियाँ कासगंज में भी सेवा देती हैं।
☀ कीमतें अक्टूबर 2026 में जाँची गईं · स्रोत: MNRE बेंचमार्क और बाज़ार के कोटेशन, DVVNL टैरिफ़ ऑर्डर, Global Solar Atlasअपना बिजली बिल डालें। हम आपको बताएँगे कि कितने kW का सिस्टम सही रहेगा, उसकी कीमत कितनी होगी और कितनी बचत हो सकती है।
| सिस्टम | सब्सिडी से पहले कीमत | केंद्र सरकार की सब्सिडी* | उत्तर प्रदेश सरकार की सब्सिडी* | कुल सब्सिडी* | आपकी जेब से खर्च | हर महीने बिजली उत्पादन | महीने की अनुमानित बचत | लागत निकलने का समय |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 kW | ₹65,000–₹80,000 | ₹30,000 | ₹15,000 | ₹45,000 | ₹20,000–₹35,000 | 117 | ₹420–₹760 | 3.0–5.5 साल |
| 2 kW | ₹1,25,000–₹1,50,000 | ₹60,000 | ₹30,000 | ₹90,000 | ₹35,000–₹60,000 | 234 | ₹990–₹1,520 | 2.6–4.0 साल |
| 3 kW | ₹1,75,000–₹2,15,000 | ₹78,000 | ₹30,000 | ₹1,08,000 | ₹67,000–₹1,07,000 | 351 | ₹1,640–₹2,280 | 3.2–4.4 साल |
| 5 kW | ₹2,90,000–₹3,50,000 | ₹78,000 | ₹30,000 | ₹1,08,000 | ₹1,82,000–₹2,42,000 | 585 | ₹2,990–₹3,800 | 4.6–5.9 साल |
| 10 kW | ₹5,50,000–₹6,50,000 | ₹78,000 | ₹30,000 | ₹1,08,000 | ₹4,42,000–₹5,42,000 | 1170 | ₹6,370–₹7,610 | 5.4–6.4 साल |
अच्छी क्वालिटी के सोलर सामान की ये आम बाज़ार कीमतें हैं। इनमें सामान और उसे लगाने का खर्च शामिल है। इन सामानों पर सरकारी सब्सिडी भी मिल सकती है। आपके घर की छत और चुने गए ब्रांड के हिसाब से कीमत कम या ज़्यादा हो सकती है। इसलिए सोलर लगवाने से पहले 2–3 कंपनियों से कीमत पूछें और उनकी तुलना करें। कीमतों के बारे में और जानने के लिए यहाँ पढ़ें।
हर महीने कितने रुपये बचेंगे, यह बिजली के बिल पर निर्भर करता है। कम बचत का अनुमान गाँव के उन घरों के लिए है जिनका पूरा बिजली बिल सोलर से बच जाता है। इसमें उत्तर प्रदेश की ग्रामीण बिजली दर ₹3.35 से ₹5.50 प्रति यूनिट और 5% शुल्क शामिल है। ज़्यादा बचत का अनुमान उन घरों के लिए है जिनका बिजली बिल अधिक है और जहाँ सोलर से ₹6.50 प्रति यूनिट वाली बिजली की बचत होती है। यानी, बिजली का बिल जितना ज़्यादा होगा, बचत भी उतनी ज़्यादा हो सकती है।
*सब्सिडी केवल घरों में लगाए जाने वाले सोलर सिस्टम पर मिलती है।
💳 किस्तों में भुगतान करना है? ₹2,00,000 का PM Surya Ghar सोलर लोन (लगभग 3 kW सिस्टम की सब्सिडी से पहले की कीमत), लगभग 6% सालाना ब्याज पर 10 साल के लिए, हर महीने लगभग ₹2,220 का पड़ता है। सब्सिडी बैंक खाते में आने पर उसे लोन में जमा कर दें, तो किस्त घटकर लगभग ₹1,000 रह जाती है। सोलर लोन की जानकारी
हमें WhatsApp पर संदेश भेजें। हम आपको आपके ज़िले में सोलर लगाने वाली कंपनियों की जानकारी और आपके बिजली बिल के हिसाब से खर्च का अनुमान भेजेंगे।
घर वालों के लिए मुफ़्त। सब्सिडी हमेशा सीधे आपके बैंक खाते में आती है।
कासगंज ज़िला 2008 में एटा से अलग होकर बना। इसलिए यहाँ के घर भी उसी DVVNL बिजली नेटवर्क से जुड़े हैं, और PM Surya Ghar के आवेदन की मंज़ूरी और नेट मीटरिंग DVVNL के दफ़्तरों से होती है। ज़िला गंगा के पुराने बहाव के किनारे बसा है। बूढ़ी गंगा के किनारे बसा तीर्थ-नगर सोरों और कासगंज के बाद सबसे बड़ा कस्बा गंज डुंडवारा, दोनों ज़िला मुख्यालय के पूर्व में हैं। कासगंज शहर एक रेलवे जंक्शन है, जहाँ से मथुरा, कानपुर और बरेली की ओर रेल लाइनें जाती हैं। काली नदी शहर के दक्षिण-पूर्व से होकर बहती है। यहाँ गर्मियाँ लंबी और बहुत तेज़ होती हैं, और इसी मौसम में छत का सोलर सिस्टम सबसे ज़्यादा बिजली बनाता है।
कासगंज ज़िले की आबादी लगभग 14,36,719 है। यहाँ करीब 2,52,000 घर हैं, जिनमें से लगभग 20% शहरों में हैं।
2011 की जनगणना के मुताबिक कासगंज ज़िले में 3 तहसीलें और 650 गाँव हैं। आप किसी भी तहसील, कस्बे या गाँव से सोलर लगवाने के बारे में जानकारी ले सकते हैं।
| तहसील | गाँव | कस्बे (जनसंख्या) |
|---|---|---|
| कासगंज | 224 | कासगंज (1,01,277), सोरों (27,468), बिलराम (12,429) |
| पटियाली | 258 | गंज डुंडवारा (45,385), भरगैन (21,891), सिढ़पुरा (15,740), पटियाली (14,366), सुजावलपुर (9,835), मोहनपुर (4,919) |
| सहावर | 168 | सहावर (24,067), अमांपुर (10,830) |
यहाँ ज़िला मुख्यालय और ज़िले का सबसे बड़ा शहर है। कासगंज शहर एक रेलवे जंक्शन है, जहाँ से मथुरा, कानपुर और बरेली की लाइनें जाती हैं। करीब 15 km दूर सोरों है, जिसे पुराने समय से सूकर क्षेत्र के नाम से जाना जाता है और परंपरा से कवि तुलसीदास से जोड़ा जाता है। यहाँ का वराह मंदिर और बूढ़ी गंगा पर हर की पौड़ी घाट मशहूर हैं, जहाँ हर साल दिसंबर में मार्गशीर्ष मेले में बड़ी भीड़ आती है। बिलराम इस तहसील का तीसरा कस्बा है।
ज़िले में सबसे ज़्यादा गाँव और सबसे ज़्यादा कस्बे इसी तहसील में हैं। कानपुर-मथुरा रेल लाइन पर बसा गंज डुंडवारा पूरे ज़िले का दूसरा सबसे बड़ा कस्बा और बड़ा बाज़ार है। पटियाली गंगा के पास बसा है और कवि अमीर ख़ुसरो का जन्मस्थान है। भरगैन, सिढ़पुरा, सुजावलपुर और मोहनपुर भी इसी तहसील के कस्बे हैं। यानी यहाँ के घर छह कस्बों और बहुत से गाँवों में फैले हैं, और सभी DVVNL के बिजली नेटवर्क से जुड़े हैं।
तीनों में सबसे छोटी तहसील, जो ज़िला मुख्यालय के पूर्व में और सोरों से करीब 12 km दूर है। सहावर 1958 में विकास खंड बना और ज़िले के बाकी हिस्से की तरह 2008 तक एटा का हिस्सा था। अमांपुर इसका दूसरा कस्बा है। यहाँ के परिवार PM Surya Ghar पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन से लेकर कंपनी के सर्वे तक, पूरी प्रक्रिया ज़िला मुख्यालय गए बिना करवा सकते हैं।
कासगंज में बिजली दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL) देता है। आपका सोलर आवेदन वही मंज़ूर करता है, और UPNEDA (उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण) इस योजना के पीछे राज्य की एजेंसी है। सब्सिडी पाने के छह कदम:
उत्तर प्रदेश सरकार की सौर ऊर्जा नीति 2022–27 के तहत केंद्र की PM Surya Ghar सब्सिडी के अलावा ₹15,000 प्रति kW की राज्य सब्सिडी भी मिलती है। यह अधिकतम ₹30,000 है। इस तरह 3 kW सिस्टम पर केंद्र से ₹78,000 और राज्य से ₹30,000, यानी कुल ₹1,08,000 तक की सब्सिडी मिल सकती है।
योजना की पूरी जानकारी: हमारी PM Surya Ghar सब्सिडी की जानकारी।
कासगंज में अच्छी धूप मिलती है, औसतन 5.2 kWh/m²/दिन। आसान भाषा में: हर 1 kW पैनल रोज़ लगभग 3.9 यूनिट बिजली बनाता है, यानी 3 kW सिस्टम साल भर में औसतन हर महीने लगभग 351 यूनिट देता है। गर्मियों में ज़्यादा, बारिश में थोड़ा कम। साथ ही ऐसा एक सिस्टम हर साल लगभग 3.5 टन CO₂ हवा में जाने से रोकता है।
UPERC के नियमों के अनुसार, घरों में 1 से 10 kW तक के सोलर सिस्टम के लिए नेट मीटरिंग की सुविधा है। इसके लिए PM Surya Ghar योजना के तहत बिजली विभाग के माध्यम से आवेदन किया जाता है।
PM Surya Ghar के तहत सब्सिडी पाने के लिए सोलर सिस्टम DVVNL की सूची में शामिल कंपनी से लगवाना ज़रूरी है। आपकी जानकारी किसी कंपनी को भेजने से पहले हम ये चार बातें जाँचते हैं:
कोटेशन मिलाने से पहले हर सिस्टम की कीमत की जानकारी देख लें। जो कोटेशन इनसे बहुत ज़्यादा या बहुत कम हो, उसे दोबारा जाँचें।
सोलर लगाने वाली कंपनियों की तुलना करें
Zsolar में पहले घर आते हैं। लेकिन अगर आप दुकान, ऑफ़िस, स्कूल, अस्पताल या फ़ैक्ट्री चलाते हैं, तो सोलर की लागत अक्सर और जल्दी वसूल होती है, क्योंकि कमर्शियल बिजली महँगी है। दो बातें जान लें: PM Surya Ghar सब्सिडी सिर्फ़ घरों के लिए है, इसलिए कमर्शियल सिस्टम बिना सब्सिडी के कोट होते हैं। और नेट मीटरिंग के अलावा उत्तर प्रदेश में 1 kW से 2 MW तक के सिस्टम के लिए ग्रॉस मीटरिंग भी है, यानी कारोबार अपनी पूरी सोलर बिजली तय दर पर ग्रिड को बेच सकता है, सालाना हिसाब के साथ, UPERC के नियमों के तहत (आवेदन के समय मौजूदा दर ज़रूर जाँच लें)।
दुकान, ऑफ़िस या फ़ैक्ट्री के लिए जानकारी भी इसी फ़ॉर्म से माँग सकते हैं। नीचे दिए बटन से फ़ॉर्म खुलेगा। उसमें अपने कारोबार के अनुसार विकल्प चुन लें।
मेरे कारोबार के लिए सोलर की जानकारीकासगंज में 3 kW सोलर सिस्टम की अनुमानित कीमत ₹1,75,000–₹2,15,000 है। केंद्र सरकार से ₹78,000 और उत्तर प्रदेश सरकार से ₹30,000 तक की सब्सिडी मिलने पर आपको लगभग ₹67,000–₹1,07,000 खर्च करने पड़ सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में घरों को केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों से सब्सिडी मिल सकती है। केंद्र सरकार 1 kW पर ₹30,000, 2 kW पर ₹60,000 और 3 kW या उससे बड़े सिस्टम पर ₹78,000 देती है। राज्य सरकार ₹15,000 प्रति kW, अधिकतम ₹30,000 देती है। इस तरह कुल सब्सिडी 1 kW पर ₹45,000, 2 kW पर ₹90,000 और 3 kW या उससे बड़े सिस्टम पर ₹1,08,000 तक हो सकती है। योजना की बताई गई अवधि मार्च 2027 तक है।
सोलर सिस्टम लगने और नेट मीटर की जाँच पूरी होने के बाद सब्सिडी सीधे आपके आधार से जुड़े बैंक खाते में आती है। यह रकम किसी इंस्टॉलर या एजेंट को नहीं दी जाती।
आवेदन आम तौर पर मकान मालिक के नाम से किया जाता है, जिनके नाम पर बिजली कनेक्शन है। अगर आप किराए पर रहते हैं, तो मकान मालिक सोलर लगवा सकते हैं। बिजली बिल में होने वाली बचत आप दोनों आपसी सहमति से बाँट सकते हैं।
कासगंज में 3 kW सिस्टम से हर महीने औसतन करीब 351 यूनिट बिजली बन सकती है। इससे गाँव के कनेक्शन पर लगभग ₹1,640 और ज़्यादा बिल वाले शहरी घर में लगभग ₹2,280 महीने की बचत हो सकती है। अपने बिजली बिल के हिसाब से अनुमान जानने के लिए ऊपर दिया कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
घर के मालिकों के लिए Zsolar की सेवा बिल्कुल मुफ़्त है। सोलर कंपनियाँ ग्राहकों की पूछताछ हमसे प्राप्त करने के लिए हमें भुगतान करती हैं। हम यह बात साफ़-साफ़ बताते हैं।
जानकारी के स्रोत: सब्सिडी और सूचीबद्ध सोलर कंपनियों की जानकारी: PM Surya Ghar पोर्टल (pmsuryaghar.gov.in) और MNRE। बिजली दरें: UPERC का 2026–27 का टैरिफ़ आदेश। सोलर लोन: PM Surya Ghar की शर्तें (रेपो रेट + 0.5%)। धूप का आँकड़ा: Global Solar Atlas। तहसील, गाँव और कस्बों की जानकारी: भारत की जनगणना 2011। कीमतें: बाज़ार से मिले अनुमान। आख़िरी जाँच: अक्टूबर 2026।